बुधवार, 29 जनवरी 2014

बता मन मेरे..गीत लिखूँ कौन सा !











शब्द सारे खो गए 
छा गया है मौन सा
अब तू बता मन मेरे 
गीत लिखूँ कौन सा ।

शब्द सागर है भरा  
साहिल है बेचैन सा
अब तू बता मन मेरे 
मोती चुनूँ कौन सा ।

ज्वलंत हैं अभिलाषाएँ 
अस्तित्व है गौण सा 
अब तू बता मन मेरे 
रास्ता बढूँ कौन सा ।

नेह हृदय है बह रहा
माझी है निष्प्राण सा
अब तू बता मन मेरे 
पतवार ढूँढू कौन सा ।

अब तू बता मन मेरे
गीत लिखूँ कौन सा ....!!

सु..मन

15 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 30-01-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन बीटिंग द रिट्रीट २०१४ ऑन ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. सुंदर शब्द ..........चित्रण
    ____________________
    ब्लॉग बुलेटिन से यहाँ पहुँचना भा गया :)

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  4. आजकल मन अक्सर जब अकेला होता है
    तो दिल के एक जिन्दा बचे कोने मे सहेज कर रखे
    तेरी यादों के टुकड़े निकाल लेता है
    और आँखों की चादर बिछाकर उस पर टुकड़ा टुकड़ा सजाता है,
    पर अब पहले सी तेरी तस्वीर नहीं बनती
    अक्स तो फिर भी तुझसे मिलता जुलता है
    तासीर नहीं मिलती।

    -पुलस्त्य

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